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प्रशामक देख रेख गृह

योजना का उद्देश्य :

  • 60 वर्ष या इससे अधिक आयु के ऐसे वरिष्ट नागरिक जो वृद्धावस्था के कारण गंभीर बीमारी एवं बिस्तर पर रहकर अपनी सम्पूर्ण दिनचर्या, क्रियाकलाप का निर्वहन करने हेतु बाध्य है, उन्हें प्रशामक देख रेख गृह में प्रवेशित कर उनकी समुचित देख रेख एवं चिकित्सीय सुविधाओ की व्यवस्था करना।

क्रियान्वयन का अभिकरण :

  • समाज कल्याण विभाग से मान्यता प्राप्त अशासकीय स्वैच्छिक संगठन अथवा त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाए/ नगरीय निकाय के माध्यम से संचालित किया जा सकेगा।

प्रशामक देख रेख गृह में दी जाने वाली सुविधाए:

  1. अन्त:वासियों को चाय-नाश्ता, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा, दवाइया, तेल, साबुन आदि प्रदान किये जायेंगे।
  2. मनोरंजन, खेल, पत्र-पत्रिकाए, टेलीविज़न आदि की सुविधाए होगी।
  3. सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन।
  4. प्रत्येक अन्त:वासी के लिए पृथक-पृथक बिस्तर, पलंग, मच्छरदानी आदि की व्यवस्था होगी।
  5. प्रशामक देख रेख गृह परिसर में बगीचा होगा।
  6. प्रशामक देख रेख गृह में अन्त:वासियों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।
  7. भवन में पर्याप्त रोशनी, शीतल जल एवं बैठने के लिए आरामदायक फर्नीचर होंगे।
  8. प्रशामक देख रेख गृह में संस्था द्वारा कलेक्टर अथवा संबधित जिले के संयुक्त/उप संचालक जिला कार्यालय समाज कल्याण की अनुशंसा से हितग्राही को प्रवेश दिया जावेगा तथा हितग्राही का बायोडाटा रखा जावेगा।
  9. अन्त:वासी की मृत्यु पर उनके धर्म के अनुसार अंत्येष्टि की जा सकेगी बशर्ते उनके परिवार का कोई भी सदस्य मृत्यु के 24 घंटे के भीतर शव प्राप्त करने हेतु उपस्थित नहीं होते।

अनुदान स्वीकृत करने की प्रक्रिया:

  1. संस्था को न्यूनतम 03 वर्षो से वृद्धाश्रम अथवा बहुसेवा केंद्र संचालन का अनुभव हो विशेष परिस्थितियों में यह संचालक के अनुमोदन से शीथिलनीय होगा।
  2. विभागीय अनुदान नियम अनुसार निर्धारित प्रपत्र में आवेदन-पत्र संलग्न हो।
  3. विभागीय मान्यता प्राप्त स्वैच्छिक संस्थाओ के प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा से संचालक समाज कल्याण संचालनालय छ.ग. को प्रेषित किये जायेंगे जिनका अनुदान नियम अनुसार परीक्षण विश्लेषण कर वित्तीय अधिकार पुस्तिका में दिए गए निर्देश अनुसार संचालक, समाज कल्याण संचालनालय छ.ग. अनुदान स्वीकृत कर सकेगा।
  4. प्रदत्त अनुदान राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र सक्षम अधिकारी के प्रतिहस्ताक्षर से महालेखाकार छ.ग. एवं संचालक, समाज कल्याण संचालनालय छ.ग. को उपलब्ध कराना होगा।
  5. स्वैच्छिक संस्था को आवर्ती व्यय 90 प्रतिशत तथा अनावर्ती व्यय 70 प्रतिशत स्वीकृत किया जा सकेगा। प्रथम वर्ष अनावर्ती अनुदान स्वीकृत करने के पश्चात 06 वे वित्तीय वर्ष में अनावर्ती अनुदान की पात्रता होगी। त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओ/ नगरीय निकायों को शत प्रतिशत अनुदान दिया जावेगा।
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